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Review Hindi

शर्माजी नमकीन रिव्ह्यु – प्यारी और भावभीनी है ऋषि कपूर की अंतिम फ़िल्म

Release Date: 31 Mar 2022 / Rated: U/A / 02hr 01min

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Sonal Pandya

हितेश भाटिया द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में परेश रावल ने कपूर के शीर्ष किरदार को पूरा किया है। यह किरदार रिटायरमेंट के बाद ज़िंदगी में अपनी पहचान बनाता है।

जिन लोगों की ज़िंदगी सिर्फ काम के इर्द गिर्द घूमती रहती हो, उनके लिए रिटायरमेंट किसी श्राप से कम नहीं। हितेश भाटिया की शर्माजी नमकीन (२०२२) के ब्रिज गोपाल शर्मा (ऋषि कपूर / परेश रावल) मधुबन होम अप्लायंस से रिटायर होने के बाद अपने आप को परिवार में होकर भी अकेला पाते हैं।

शर्माजी की पत्नी नहीं है, लेकिन दो बेटे रिंकू (सुहेल नय्यर) और विंसी (तारुक रैना) हैं। शर्माजी अपने आप को घर के कामकाज में व्यस्त करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें कुछ कमी ज़रूर खलती है। दोस्त और रिश्तेदार पार्ट टाइम काम करने का मशवरा देते हैं, जैसे के रियल इस्टेट ब्रोकर या कुत्ते को घुमाने का काम, वहीं बड़ा बेटा उन्हें योगा का सुझाव देता है।

मगर शर्माजी का दिल किचन में ज़्यादा लगता है। अपने बच्चों के लिए वे हमेशा बेहतरीन स्वादवाली डिशेस बनाया करते हैं। उनका सोचना है के नाश्ते के लिए कोई ढाबा खोला जाए, पर इस कल्पना को रिंकू ख़ारिज कर देता है। शर्माजी आखिरकार एक ऐसे नए करियर में आ जाते हैं जहाँ उनके बिलकुल नए दोस्त उन्हें वज़न कम करना सीखा रहे हैं।

शर्माजी का एक दोस्त (सतीश कौशिक) उन्हें किसी सत्संग के लिए खाना बनाने का काम देता है। मगर गलती से वे दिल्ली के महिलाओं के एक ग्रुप की किटी पार्टी पहुंच जाते हैं। इन भूमिकाओं में शीबा चड्ढा, जूही चावला और आयेशा रज़ा मिश्रा ने काम किया है। इस अनुभव से डर कर शर्माजी भाग खड़े होते हैं, पर आखिरकार उन्हें और नयी पार्टीयों का काम देकर मनाया जाता है।

जल्द ही शर्माजी टाय पहने, ब्रीफकेस लिए कई कार्यक्रमों में खाना बनाने जाने लगते हैं और किटी पार्टी वाली महिलाओं के अच्छे दोस्त बन जाते हैं। पर जब उनके परिवार में यह बात पता चलती है, तो विवाद खड़ा हो जाता है।

भाटिया की फ़िल्म में पीढ़ियों के बीच की दूरियां नज़र आती हैं, जहाँ पिता सुभाष नगर के अपने पुराने, जर्जर घर में रहना चाहते हैं और बेटा उसकी साथी उर्मि (ईशा तलवार) के साथ शादी के बाद अलग निकलकर गुरग्राम रहना चाहता है। मज़ेदार ये है के फ़िल्म में एक जोक भी चलता है के कैसे पुरानी पीढ़ी बागबान (२००३) फ़िल्म को सराहती है, जिसमे बुजुर्गों को नज़रअंदाज़ किए जाने के दर्द को दिखाया गया है।

शर्माजी नमकीन में दिखाई गयी समस्या नयी नहीं है, पर फ़िल्म की प्रस्तुति बड़ी ही प्यारी और भावुक है। इस फ़िल्म की शूटिंग पूरी होने से पहले ही ऋषि कपूर का अप्रैल २०२० में देहांत हो गया था। उनके पश्चात परेश रावल ने उनकी भूमिका निभाई। दोनों कलाकार रिटायर इंसान के अलग व्यक्तित्व को अपने अंदाज़ में पेश करते हैं।

कपूर ने प्यारा लेकिन अपने में उलझा, गड़बड़ी में फंसा हुआ पिता साकार किया है, वहीं रावल ने बच्चों से अलग महसूस करनेवाले पिता की पीड़ा दर्शाई है। दोनों कलाकारों का किटी पार्टी गैंग से सहज व्यवहार स्पष्ट दिखाई देता है, खास कर चावला के किरदार वीना मनचंदा के साथ, जिसके सामने शर्माजी खुल कर बात कर सकते हैं।

कपूर और रावल दोनों ने फ़िल्म का बोझ सहजता से संभाला है, कई बार एक ही दृश्य में दोनों भी हैं और एडिटर बोधादित्य बैनर्जी ने इसे खूबी से जोड़ा है के कहीं भी ये अटपटा नहीं लगता।

परमीत सेठी मेहमान भूमिका में दिल्ली वालों की खास पहचान दर्शाते हैं और जूही चावला की फिर एक बार महत्वपूर्ण भूमिका देख कर बहुत अच्छा लगता है। कुछ दृश्यों में तो उन्होंने कॉमेडी की टाइमिंग और किरदार को आवश्यक सहानुभूति बखूबी दर्शाई हैं।

सुप्रतीक सेन और भाटिया ने इस फ़िल्म का लेखन किया है। कई मज़ेदार दृश्यों को स्नेहा खानवलकर के संगीत ने और मज़ेदार किया है, जहाँ शर्माजी अपनी नयी ज़िंदगी सबसे छुपाने की कोशिश कर रहे हैं और जो आखिरकार बड़े ही मज़ेदार और रोचक तरीके से ज़ाहिर हो ही जाता है।

शर्माजी नमकीन में आप कुछ मजेदार पकवान बनते हुए भी देख पाएंगे, जिस वजह से मेरी राय है के आप यह फ़िल्म खाली पेट ना देखें। यह हास्य-व्यंग से भरा मनोरंजक नाट्य ऋषि कपूर के लिए सर्वोचित श्रद्धाजंलि है।

शर्माजी नमकीन अमेज़न प्राइम पर उपलब्ध है।

 

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