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छोटा भीम कुंग फु धमाका रिव्ह्यु – भारत का लोकप्रिय एनिमेटेड किरदार कर रहा चीन के राजा की सहायता

Release Date: 10 May 2019 / Rated: U / 01hr 53min

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Cinestaan Rating

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Sonal Pandya

यह ३डी एनिमेशन फ़िल्म भारतीय एनिमेशन दुनिया का अगला पड़ाव अवश्य है, पर बच्चों की इस फ़िल्म को बेहतर स्क्रिप्ट से और ऊँचे स्तर पर ले जाया सकता था।

छोटा भीम फ़िल्म सीरीज़ की इस फ़िल्म में ढोलकपुर की गैंग, छोटा भीम और उसके दोस्त, चीन के राजा जियान और उसकी बेटी, राजकुमारी किया, को उनके राज्य में शांति प्रस्थापित करने में मदद करते हैं।

भीम और उसकी गैंग इस राज्य में एक अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हिस्सा लेने आये हैं, जहाँ भारत के अलावा रूस और अफ्रीका जैसे देशों से भी प्रतिस्पर्धियों ने हिस्सा लिया है।

छोटा भीम की गैंग को राजकुमारी किया और उसके मित्र मिंग, जो की कुंग फु का विद्यार्थी है, राजमहल में आमंत्रित करते हैं। बहुत जल्द वे मित्र बन जाते हैं। पर मुकाबले के दूसरे पड़ाव में राजा जियान का भतीजा जुहू राजकुमारी किया को भगा ले जाता है और राजगद्दी पर अपना दावा करता है।

राजकुमारी किया का जादुई ड्रैगन के साथ एक विशेष संबंध है जिसका फायदा जुहू उठाना चाहता है। जुहू उस शक्ति का उपयोग कर अपने मिट्टी की सेना को कार्यान्वित कर चीन पर कब्ज़ा करना चाहता है। पर भीम और उसके दोस्तों को विश्वास है के वे किया को बचा लेंगे।

छोटा भीम कुंग फु धमाका का सह निर्देशन राजीव चिलका और बिनायक दास ने किया है। यह फ़िल्म भारत की बेहतर कम्यूटर निर्मित प्रॉडक्शन्स में से एक है। इस ३डी फ़िल्म में कई सारे सेट्स, खूबसूरत पार्श्वभूमि तथा बहुत से अच्छे एक्शन दृश्य हैं। इन लोकप्रिय किरदारों को पिछली फ़िल्मों से बिकुल अलग रंग ढंग में यहाँ पेश किया गया है।

भीम के साथ साथ उसके दोस्त चुटकी, राजू, कालिया, जुड़वाँ भाई ढोलू और भोलू और बोलनेवाला बंदर जग्गू सभी को यहाँ भरपूर मौका दिया गया है। झेन और कुंग फु का मास्टर बनकर भीम यहाँ किया को बचाने में कामयाब होता है।

पर कहीं कहीं प्रॉडक्शन की खामियां खलती हैं। लगभग हर दृश्य में मूविंग कैमरा का इस्तेमाल किया गया है और ३डी साहसिक एक्शन फ़िल्म में ये जरूरत से ज़्यादा लगने लगता है। अच्छी फ़िल्मों में ३डी का उचित उपयोग किया जाता है। इस इफेक्ट को इस तरह से इस्तेमाल करना आवश्यक है के लोग उसके परिणाम को न देखते हुए कहानी में अधिक रूचि लेने लगे। पर यहाँ वैसा नहीं होता।

हालांकि एनिमेशन के हिस्से में अच्छा परिणाम देखने को मिलता है, पर किरदारों की लिप-सिंकिंग में सफाई नज़र नहीं आती। फ़िल्म के गाने अनावश्यक लगते हैं। इसमें हॉरलिक्स का प्रमोशन किया हुआ गाना भी शामिल है। सिर्फ़ छोटे बच्चे ही इसे पसंद कर पाएंगे।

फ़िल्म की सबसे कमज़ोर कड़ी है इसकी स्क्रिप्ट। निधि आनंद और तेजा आनंद के रचे हुए हास्य व्यंग के क्षण बहुत कम हैं और स्लैपस्टिक शैली के व्यंग का इस्तेमाल कर हास्य निर्मिति का प्रयास किया गया है। राजकुमारी किया को वापस लाने के सफर में रचे गए मुश्किलों को एकसंध और छोटा करने की आवश्यकता थी।

भारतीय एनिमेटेड फ़िल्म्स पश्चिमी फ़िल्मों को देख कर अपने में तकनिकी सुधार लाते है, पर साथ ही उन्हें अपने कथासूत्र पर भी ध्यान देना आवश्यक है। पर छोटा भीम के फैन्स के लिए फ़िल्म में मज़ा लेने के लिए बहुत कुछ है, क्यूंकि उनका हीरो जुहू जैसे विलन के साथ वीरता से लड़ता है।

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