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प्रधानमंत्री या गृहमंत्री को खुश करने के लिए फ़िल्में बनाना शर्मनाक है, कहते हैं यशपाल शर्मा


फ़िल्म और रंगमंच की दुनिया के लोकप्रिय कलाकार यशपाल शर्मा ने दिल्ली में हुई सार्वजनिक हिंसा को लेकर सरकार की निंदा की।

Our Correspondent

दिल्ली में हाल में हुई सार्वजनिक हिंसा, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), और राष्ट्रिय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की धमकी को लेकर सरकार की आलोचना करने वालों में एक और कलाकार, यशपाल शर्मा, का नाम जुड़ गया है।

शर्मा ने किसी का नाम लिए बगैर राजनितिक व्यक्तित्व पर बन रहे बायोपिक के ट्रेंड की भी निंदा की। "बतौर निर्देशक जब आपको लगे के किसी को खुश करने के लिए फ़िल्म बनानी चाहिए, समझ लीजिये आप मर चुके हैं," उन्होंने एएनआई न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा। "आपकी सृजनात्मकता के लिए ये शर्म की बात है के आपको प्रधानमंत्री या गृहमंत्री को खुश करने के लिए फ़िल्म बनाने की इच्छा हो रही हो।"

इस बातचीत के दौरान शर्मा ने ये भी कहा के वे नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हैं, जो पिछले वर्ष दिसंबर में संसद में पारित किया गया। साथ ही राष्ट्रिय नागरिक रजिस्टर के किसी भी प्रपोजल का भी वे विरोध करते हैं।

"हालांकि मैं ये नहीं कह सकता के मैंने इसे १००% पढ़ लिया है, पर मेरी जानकारी के अनुसार और जितना भी मैं समझ सका हूँ, मैं इसका विरोध करता हूँ। इसका कारण ये है के आप देश को बेमतलब की बातों में उलझा कर रख रहे हैं, जैसे के हमें कतार में खड़ा करना या कागज़ादो के लिए दौड़ाना। लोगों के पास काम नहीं है तो इसका मतलब ये नहीं के आप लोगों को ऐसा काम दें। असली काम देना है तो नौकरी दीजिये," उन्होंने कहा।

दिल्ली में हुई सार्वजनिक हिंसा के बारे में शर्मा ने कहा के दोनों पक्ष गलत हैं, लेकिन कुछ राजनितिक नेताओ के उग्र भाषणों की वजह से ही ये सबकुछ शुरू हुआ है। "मेरे अभ्यासनुसार बीजेपी के हारे हुए उम्मीदवार कपिल मिश्र जैसे लोगों के उग्र भाषण इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। जब ट्रम्प का आगमन हुआ उसी वक़्त उन्होंने ऐसे ज़हरीले भाषण दिए, जो के गलत था,” उन्होंने कहा।

शर्मा ने दिल्ली की सार्वजनिक हिंसा की तुलना गुजरात के २००२ की दंगलों से की। "दंगो के लिए पथ्थर ट्रकों में भर कर आये थे। एक तरफ 'जय श्री राम' और दूसरी तरफ 'अल्लाहु अकबर' कहा जा रहा है। ये तो गुजरात के २००२ के दंगो की तरह है। पुलिस मात्र दर्शक बने खड़े हैं," उन्होंने कहा।

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