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मलंग की भूमिका के लिए अनिल कपूर ने हार्वी कायटल की बैड लेफ्टनंट का सहारा लिया


उन्होंने ये भी कहा के उन्हें ख़ुशी होती है के पत्रकार आज भी उनका इंटरव्ह्यू लेना चाहते हैं।

Keyur Seta

अपने लंबे करिअर में राम लखन (१९८९) से लेकर शूटआउट ऍट वडाला (२०१३) तक अनिल कपूर ने कई बार पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। मोहित सूरी की हाल में प्रदर्शित हुई फ़िल्म मलंग (२०२०) में भी उन्होंने फिर एक बार पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। पर उन्होंने कहा के ऐसे पुलिस अफसर की भूमिका उन्होंने पहले कभी नहीं निभाई और इसकी एक वजह इस किरदार की विचित्र मानसिक स्थिति है।

"उसके डिपार्टमेंट और व्यवस्था के खिलाफ उसके मन में आक्रोश है," उन्होंने कहा। "वो गोवा में रहता है। वहाँ वो पुलिस अफसर है। वो गोवा के हालात से खुश नहीं है। उसे लगता है के गोवा अब पहले जैसा नहीं रहा। उसे लगता है वो क्या था और अब क्या हो गया है, इसलिए वो अपने आप से और अपने जीवन से भी गुस्सा है।"

कपूर ने कहा के उन्होंने गुस्सैल किरदार पहले भी निभाए हैं, पर जो हरकतें ये किरदार करता है उससे ये बाकि किरदारों से बिलकुल अलग है। "ज़्यादातर जब कोई गुस्सा होता है, तो वो गुस्सा किसी पर उतारता है," उन्होंने कहा। "बाद में वो भूल जाता है और घर जाता है। ये कैथार्सिस या अपने आप को खाली करने जैसा है। पर ये इंसान घर नहीं जाता। उसे शराब से भी बड़ा नशा चाहिए। वो अपने आप को तकलीफ देना चाहता है। जो शायद उसके लिए सही नहीं है, वैसी बाते वो खुद पर करना चाहता है। ड्रग्स लेना बुरा है, पर फिर भी वो लेते रहता है।"

कपूर ने कहा के इस किरदार को कैसे निभाना होगा इस बारे में वो चिंतित थे, ताकि दर्शकों को वो किरदार घिनौना या बेहद अजीब ना लगे। "वो भी इस किरदार का आनंद उठा पाए। क्योंकि ये कमर्शियल फ़िल्म है, कोई आर्ट फ़िल्म नहीं। इसी लिए इसे निभाने के लिए मुझे थोड़ी ज़्यादा मेहनत करनी पड़ी," उन्होंने कहा।

उन्होंने कुछ वर्कशॉप्स और कुछ रिसर्च भी किया। कपूर ने पश्चिम की कुछ फ़िल्में भी देखीं, जिनमे ऐसे किरदार हैं। "हमारे यहाँ या इंटरनैशनली भी ऐसे किरदार को लेकर कोई फ़िल्म हो तो उसे देखना था," उन्होंने कहा। "हर्ष (हर्षवर्धन कपूर, बेटा) ने सुझाव दिया के मैं बैड लेफ्टनंट (१९९२) देखूँ। मैंने समझा के हार्वी कायटल का किरदार मेरे किरदार जैसा ही है। वो थोड़ा अधिक डार्क किरदार है।"

कपूर ने बताया के उन्होंने निकलस केज की २००९ की फ़िल्म बैड लेफ्टनंट: पोर्ट ऑफ़ कॉल न्यू ओर्लिन्स भी देखि। दोनों फ़िल्मों का निर्माण एडवर्ड प्रेसमन ने किया था। "पर मेरा व्यक्तित्व, देश और व्यवस्था अलग है। इसलिए मैंने सोचा के मैं इसे कैसे इस्तेमाल करूँ। फिर मैंने मुम्बई के कुछ एनकाउंटर स्पेशलिस्ट से बात की," उन्होंने कहा। 

उन्हें पूछा गया के ४० वर्ष बाद भी वे वही लगन और उस्ताह कैसे रख पाते हैं। कपूर ने बताया के काम करते हुए उनका सारी चिंताओं से मन हट जाता है। "जब मैं काम करता हूँ, मुझे खुशी होती है। इससे मुझे राहत मिलती है और मैं शांत होता हूँ। जब मैं किरदार पर काम करता हूँ तब मैं अस्वस्थ रहता हूँ, थोड़ा अजीब रहता हूँ। पर जैसे धीरे धीरे किरदार की पकड़ मिलती जाती है, मैं खुश होने लगता हूँ। मैं मेरे दोस्तों और परिवार के लिए बहुत अच्छा हूँ और जब मैं काम करता हूँ तब मैं काफ़ी मनोरंजक और मज़ेदार बन जाता हूँ," उन्होंने बताया।

१९७० के दशक के अंत में जब अनिल कपूर ने अपने करिअर की शुरुवात की थी, तब प्रमोशन्स इतने नहीं होते थे। १९९० के दशक में भी ज़्यादातर वैसा ही माहौल था। पर कपूर ने कहा के आज के व्यस्त प्रमोशन के शेड्यूल से उन्हें कोई परेशानी नहीं है। "आपको इस बात से खुश होना चाहिए के आप आज भी समकालीन बने हैं और पत्रकार आप से सवाल पूछने, इंटरव्ह्यू लेने के लिए तैयार हैं। ऐसे कई कलाकार हैं जो बेसब्री से इंटरव्ह्यू देना चाहते हैं। अगर आप इस तरह सोचें तो आप इस प्रक्रिया का आनंद उठा सकते हैं," उन्होंने कहा।

मलंग में अनिल कपूर के साथ आदित्य रॉय कपूर, दिशा पटनी और कुणाल केमू भी मुख्य भूमिका में हैं। फ़िल्म ७ फरवरी को प्रदर्शित हो चुकी है।

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