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१२० कलाकार, १७३ ड्रेसेस और ४० फ़ुट के सेट से तैयार हुआ है भारत फ़िल्म का ग्रैंड सर्कस


अली अब्बास ज़फर निर्देशित भारत में ग्रैंड सर्कस कैसे बनाया गया इसका विस्तृत विवरण इसके मेकिंग विडिओ में दिया गया है।

Shriram Iyengar

सलमान ख़ाँ के भारत का ट्रेलर इसकी भव्यता का दर्शन कराता है जिसमे अहम हिस्सा लिया है ग्रैंड सर्कस ने। १९६० के दशक का ये ग्रैंड रशियन सर्कस फ़िल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल ही जारी किये गए मेकिंग विडिओ में इस ग्रैंड सर्कस को जिन बारीकियों के साथ और बड़ी मेहनत से बनाया गया है, उसका विस्तृत विवरण दिया गया है।

सर्कस की कहानी का महत्त्व इस बात से पता चलता है जब निर्देशक ज़फर इसे सबकी यादों से जोडते हैं। इस बारे में वे कहते हैं, "उस वक़्त क्या होता था ये सबकी यादों से जुड़ा हुआ है और मुझे जहाँ तक याद आता है, उसीसे सलमान ख़ाँ को स्टंटमैन बनाने की कल्पना बनी है।"

पर इस सर्कस का निर्माण करना आसान नहीं था। ४० फ़ुट ऊँचे सेट पर उस समय की बारीकियों के साथ उसे मॉडर्न टच देने के लिए प्रॉडक्शन डिज़ाइनर तथा एरियल रीगर्स को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी।

ज़फर आगे बताते हैं, "जब उस समय सर्कस हुआ करते थे, तो दुनिया भर के कलाकार उसमे होते थे। हमने दुनिया भर से कलाकार, जगलर्स, स्टिल्ट वॉकर्स, फायर थ्रोअर्स, एक्रोबेट्स, ट्रपीज आर्टिस्ट इन सबको बुलाया। हर रोज करीबन १२० कलाकार सेट पर होते थे।"

इतनी बड़ी तादात में कलाकारों का होना कॉस्च्यूम डिज़ाइनर के लिए भी मुश्किल भरा काम था। एश्ले रिबेलो विडिओ में कहते हैं, "सर्कस तो शुरुवात में हमारे लिए बहुत मुश्किल भरा काम रहा, क्यूंकि १७३ ड्रेसेस आप परफोर्मिंग आर्टिस्ट्स के लिए कैसे लाएंगे? हमने काफ़ी प्रयोग किए जिसमे हम आर्टिस्ट्स को ड्रेस देते थे और वे बाद में हमें बताते थे के क्या वे उसे पहनकर परफॉर्म कर सकते हैं या नहीं।"

फ़िल्म में सलमान ख़ाँ की एंट्री के लिए सर्कस का इस्तेमाल किया गया है। सलमान एक स्टंटमैन बने हैं जो मौत के कुएँ में स्टंट करता है। इसी सर्कस में दर्शकों को दिशा पटनी का किरदार भी देखने मिलता है।

भारत ५ जून को प्रदर्शित हो रही है।

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