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कलंक गाना 'घर मोरे परदेसिया' – रामलीला के समारोह में आलिया भट्ट और माधुरी दीक्षित हैं साथ एक सुमधुर गीत में


श्रेया घोषाल और वैशाली म्हाड़े द्वारा गाये इस गीत को संगीतकार प्रीतम ने संगीत दिया है।

Shriram Iyengar

आलिया भट्ट के पास कुछ बेहतरीन डांस नंबर्स अवश्य हैं पर इससे पूर्व उन्होंने किसी गाने में माधुरी दीक्षित नेने जैसी अदाकारा के साथ नृत्य नहीं किया था। 'घर मोरे परदेसिया' गाने में वो कमी पूरी हो चुकी है। यह खूबसूरत गाना भारतीय स्वतंत्रता के पूर्व काल के संगीतमय रामलीला समारोह में समाजवाद को भी मज़बूत करता हुआ दिखता है।

गाने के शुरुवात में माधुरी दीक्षित नेने बहार बेग़म के रूप में एक झूले पर गाती नज़र आती हैं। वहीं बाहर की ओर आलिया भट्ट साकारित रूप दशहरे के उत्सव में शहर में घूम रही है। राम, लक्ष्मण, सीता के वेश में दिख रहे कलाकार, सजाया हुआ शहर, यह सब देखने में अद्भुत लगता है। पर तुरंत ही बहार बेग़म के गाने से रूप का ध्यान बहार के महल की तरफ खींचता है, जहाँ वो डांसर्स के साथ जुड़ कर झूमने लगती है।

गाने के दृश्य कहानी की पार्श्वभूमि की तरफ इशारा करते हैं तथा यहाँ शायद पहली बार बहार और रूप आमने सामने आते हैं। हालांकि हम वरुण धवन के किरदार ज़फर को भी गाने में देखते हैं, पर वो रूप का पीछा नहीं कर रहा। पर फिर भी दोनों एक दूसरे के सामने आने से कुछ पल के फासले से चूक रहे हैं। यूँ भी लगता है के ज़फर बहार के महल से परिचित है जहाँ वो शायद रूप को मिल पायेगा।

यह गाना शास्त्रीय संगीत पर आधारित है तथा इसे श्रेया घोषाल और वैशाली म्हाड़े ने गाया है। प्रीतम के संगीत में यह गाना धीमे स्वरों के साथ शुरू होकर आगे टेम्पो रिदम के साथ बढ़ते जाता है।

माधुरी दीक्षित नेने और आलिया भट्ट के किरदारों की जुगलबंदी, जिसे घोषाल और म्हाड़े ने खूबसूरती से पेश किया है, गाने का मुख्य आकर्षण है। दोनों गायिकाओं ने बेहद खूबसूरती से इस गाने को गाया है और एक बड़े बजट की फ़िल्म के गाने के रूप में ये खूब जचता है। गाने को थोडासा स्टाइलाइज्ड भी किया गया है, मगर फिर भी इसे सुनना और देखना एक सुखद अनुभव है।

अमिताभ भट्टाचार्य के बोल राम के सीता के प्रति आकर्षण और प्रेम को दर्शाते हैं जिससे भट्ट के किरदार को भी जोड़ा जा सकता है। इस गाने की प्रतीकात्मकता पर गौर करें तो ये भी नज़र आता है के सीता रामायण की कहानी की मुख्य पात्र थी तथा श्री राम ने सीता को अपनी निष्कलंकता को सिद्ध करने के लिए अग्निपरीक्षा देने को कहा था। क्यूंकि फ़िल्म का नाम 'कलंक' है, तो शायद इस गाने का और भी गर्भित अर्थ हो सकता है।

कोरिओग्राफी की बात करें तो देवदास (२००२) के 'डोला रे' गाने की तरह उत्सव का माहौल इस गाने में भी है, पर यहाँ का जोश अलग है। इतने बड़े और सजाये हुए महल में सिर्फ़ भट्ट का किरदार ही मुख्य रूप से मंच पर नाच रहा है। हालांकि भट्ट पारंपरिक नृत्य में भी अपना कमाल दर्शाती हैं। पर दीक्षित नेने और भट्ट का नृत्य एक साथ देखने का मज़ा यह गाना नहीं देता। शायद वो फ़िल्म में देखने मिलेगा।

कलंक के बाकि कलाकारों में संजय दत्त, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य रॉय कपूर हैं। फ़िल्म का निर्देशन अभिषेक वर्मन ने किया है और १७ अप्रैल को फ़िल्म प्रदर्शित हो रही है। गाना यहाँ देखें।

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