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स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन लेखकों को साहित्यिक चोरी के खिलाफ करेगी कानूनन मदद


स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन कॉपीराइट वकीलों का एक पैनल बनाकर रिआयती दरों में उनकी सेवा प्रदान करने की योजना बना रही है।

अंजुम राजाबली, कमलेश पांडे

Mayur Lookhar

अपने स्क्रिप्ट्स को लेकर समस्याएं झेल रहे लेखकों को स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन (एसडब्ल्यूए) की तरफ से साहित्यिक चोरी को लेकर मदद मिलनेवाली है।

एसडब्ल्यूए ने योजना बनाई है के वे लेखकों को साहित्यिक चोरी के खिलाफ कानूनन मदद प्रदान करेंगे। "हमने कानूनन मदद के लिए फंड इकट्ठा करने की तैयारी की है, जो हर एक केस पर अलग से काम करने के लिए इस्तेमाल होगा। अगर ज़रुरत पड़ती है तो हम ५० प्रतिशत से भी अधिक फंड देंगे," स्क्रीन रायटर और एसडब्ल्यूए कार्यकारी समिति के सदस्य अंजुम राजाबली ने एक निवेदन में कहा।

एसडब्ल्यूए फ़िल्म लेखकों की प्रमुख भारतीय संघटना है जिसमे २५,००० से अधिक सदस्य हैं। रॉबिन भट्ट इस संघटना के अध्यक्ष हैं।

स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन कॉपीराइट वकीलों का एक पैनल बनाकर रिआयती दरों में उनकी सेवा प्रदान करने की योजना बना रही है। "हमारे पास कॉपीराइट कानून के विशेषज्ञ हैं जो की ये तय करेंगे के क्या की गई फ़रियाद में कॉपीराइट के तहत कोई तथ्य बनता है," राजाबली ने कहा। काबिल केसेस को फिर डिस्प्यूट्स सेटलमेंट कमिटी के पास भेजा जाएगा।

"फ़िल्म इंडस्ट्री को भी इस बात की एहतियात बरतनी होगी की उनके पास जो भी लिखित चीज़ें आती हैं वो कॉपीराइट चोरी के ना हों," राजाबली ने आगे बताया।

चालबाज़ (१९८९) और रंग दे बसंती (२००६) जैसी फ़िल्मों के लेखक कमलेश पांडे ने इस योजना का स्वागत किया। 

सिनेस्तान से बात करते हुए कमलेश पांडे ने कहा, "लंबे समय से हम इस बात को अमल पर लाना चाहते थे। जब मैं स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन का जनरल सेक्रेटरी था तब हमने इस विषय पर चर्चा भी की थी। उस समय यह असोसिएशन एफ डब्ल्यू आय सी ई [फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सीने एम्प्लॉइज़] से जुडी हुई थी, पर हमारे सूचनाओं पर तब ध्यान नहीं दिया गया। हमारे पास १६ वर्षों से शिकायतें पड़ी हुई हैं, पर अब तक उन का कोई हल नहीं निकल पाया है।"

पांडे ने कहा के उस समय एफ डब्ल्यू आय सी ई का लेखकों की तरफ बर्ताव ही उनकी समस्या थी और आरोपित निर्माताओं के खिलाफ वे कोई कार्यवाही करें इसकी कोई संभावना नहीं थी।

"एफ डब्ल्यू आय सी ई ने ज़्यादातर ज्युनियर आर्टिस्ट की समस्याओं को समाधान देने की कोशिश है, जो रोजाना तौर पर पैसे कमाते हैं। वे निर्माता के खिलाफ असहयोग का पत्र भेज सकते हैं और उससे शूटिंग रोक भी सकते हैं। पर हम लेखक ऐसा नहीं कर सकते, क्यूंकि शूटिंग शुरू होने से पूर्व ही हमारा लिखने का काम पूरा हो चूका होता है। इसलिए पिछले वर्ष अक्टूबर में हुये स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन के चुनाव के बाद हमने एफ डब्ल्यू आय सी ई से अलग होने का निर्णय लिया क्यूंकि वे हमारी समस्याओं पर कोई ठोस काम नहीं करते थे," पांडे ने कहा।

पांडे ने बताया के लेखकों के साहित्य की चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। उन्होंने जन्नत २ (२०१२) की प्रसिद्ध केस के बारे में बताया, के कैसे निर्माता महेश भट्ट को कपिल चोपडा जैसे युवा लेखक को रु३० लाख की भरपाई देनी पड़ी।

"लेखक कपिल चोपडा हमारे पास आये थे। उनके पास सारे सबूत थे और इसी लिए हमने उन्हें कोर्ट में जाने के लिए कहा। महेश भट्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट में चोपडा को रु१० लाख देने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहाँ उन्हें रु३० लाख देने का आदेश दिया गया। इसी लिए अगर किसी लेखक को फसाया जा रहा है, तो अब हम सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार हैं," उन्होंने कहा।

पांडे चाहते हैं के एसडब्ल्यूए एक दिन रायटर्स गिल्ड ऑफ़ अमेरिका (डब्ल्यूजीए) की तरह समर्थ संघटन बने। "अगर आपको याद हो, कुछ वर्ष पहले रायटर्स गिल्ड ऑफ़ अमेरिका ने हॉलीवुड से टक्कर ली थी। छह महीने के लिए फ़िल्म और टीवी इंडस्ट्री ठप्प हो चुकी थी। आखिरकार उनके कोर्ट ने भी डब्ल्यूजीए के पक्ष में निर्णय दिया। वो काफ़ी ताकतवर संघटन है। उनका खुद का ऑफिस है, सबल आर्थिक स्थिति है, और कई सारे वकीलों की टीम उनके साथ है। मैं आशा करता हूँ के किसी दिन स्क्रीनरायटर्स असोसिएशन भी उन्ही की तरह सामर्थ्यशाली बनेगी। ये कदम एक शुरुवात है।"

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