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आर्टिकल १५ ट्रेलर – जाती, भेदभाव और कायदे पर आयुष्यमान का तीखा प्रहार


अनुभव सिन्हा निर्देशित यह फ़िल्म २८ जून को प्रदर्शित हो रही है।

Sonal Pandya

पिछले वर्ष आयी मुल्क फ़िल्म के बाद इस वर्ष निर्देशक अनुभव सिन्हा हमारे देश के बढ़ते आतंरिक संघर्ष पर तीखे प्रहार करते हुए एक और फ़िल्म लेकर आए हैं। आर्टकिल १५ की कहानी उत्तर भारत में स्थित है, जिसमे एक पुलिस अफसर ऐसी केस सुलझाने की कोशिश कर रहा है जहाँ दो लड़कियों का बलात्कार कर उन्हें मार दिया गया है और एक लड़की गायब है।

आयुष्यमान खुराणा यहाँ अयान बन कर इलाके के नए पुलिस अफसर के रूप में आते हैं। वो निडर और दृढनिश्चयी है। खून की गई लड़कियों और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए वो तत्पर है। इस दौरान उसे सामाजिक, धार्मिक और जाती के भेदभाव के बारे में धीरे धीरे पता चलता है।

भारतीय संविधान की धारा १५ के अनुसार धर्म, नस्ल, जाती, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी से भेदभाव करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी से आर्टिकल १५ फ़िल्म की प्रेरणा ली गई है।

आयुष्यमान खुराणा पहली बार पुलिस अफसर की भूमिका निभा रहे हैं। इस फ़िल्म में उनके साथ मनोज पाहवा, कुमुद मिश्र, सयानी गुप्ता, ईशा तलवार और नासेर काम कर रहे हैं। देश की कई सत्य घटनाओं से प्रेरित यह फ़िल्म धर्म और जाती के नाम पर बढ़ रहे उन्माद पर तीखा प्रहार करती है।

शुरुवाती दृश्यों में लड़कियों पर जिस बेदारकारी से अत्याचार किये गए उसके कुछ छोटे दृश्य दिखते हैं। फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी एवन मलिगन ने की है। सिन्हा इस ट्रेलर द्वारा हमें गुस्सा भी दिलाते हैं के सामान्य नागरिकों के जीवन से इतनी निर्दयता से पेश आने पर भी हम इन घटनाओं को किस साधारण तरीकेसे लेते हैं। टीज़र की तरह यहाँ भी डॉ बी आर आंबेडकर के 'सबसे पहले और अंतिमतः भी, भारतीय बनो' इस वाक्य को दर्शा कर ट्रेलर की तीव्रता और बढ़ाई गई है।

फ़िल्म २८ जून को प्रदर्शित हो रही है। ट्रेलर यहाँ देखें।

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