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क्या मणिकर्णिका कंगना रनौत को बॉक्स ऑफिस क़्वीन के स्थान पर वापस ले जाएगी?


अभिनेत्री कंगना रनौत की २०१५ से कोई भी फ़िल्म हिट साबित नहीं हुयी है और वे ज्यादातर विवादों से घिरी रही हैं। पर ट्रेड तज्ञो के अनुसार मणिकर्णिका के शुरुवाती बिज़नेस पर इन चीज़ो का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

Mayur Lookhar

कंगना रनौत पहली ऐसी हिंदी अभिनेत्री हैं जिन्होंने खुद के बलबूते पर रु१०० करोड़ की हिट फ़िल्म दी और इस बातका उन्हें जरूर गर्व होना चाहिए।

पर तनु वेड्स मनु रिटर्न्स (२०१५) को अब ४ वर्ष हो चुके हैं और तबसे इस शुक्रवार को आ रही मणिकर्णिका: द क़्वीन ऑफ़ झाँसी के प्रदर्शन तक बहोत कुछ बदल चूका है।

मणिकर्णिका ये झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की कहानी है जो १८५७ में हुए स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज़ो से बहादुरी से लड़ी थीं। यह फ़िल्म सिर्फ़ इसलिए विशेष नहीं है के इसमें शूरवीर वीरांगना का जीवन दिखाया गया है, बल्कि इसलिए भी क्योंकि ये फ़िल्म इसकी मुख्य नायिका के करिअर के लिए भी महत्वपूर्ण है।

कंगना सिर्फ़ इस फ़िल्म की नायिका नहीं है बल्कि राधा कृष्ण जगारलामुडी, जिन्हे क्रिश के नाम से जाना जाता है, उनके फ़िल्म छोड़ने के बाद इस फ़िल्म की निर्देशिका भी बनी।

झी स्टुडिओज़ तथा कमल जैन की कैरोज़ कॉन्टेंट ने इस पीरियड फ़िल्म का निर्माण किया है तथा ईज़ माय ट्रिप डॉट कॉम के निशांत पिट्टी इस फ़िल्म के सह निर्माता हैं। झी स्टुडिओज़ खुद इस फ़िल्म का वितरण भी कर रहे हैं। बाहुबली फ्रैंचाइज़ के लेखक के वी विजयेंद्र प्रसाद ने इसकी कहानी लिखी है और शंकर एहसान लॉय ने फ़िल्म में संगीत दिया है। प्रसून जोशी फ़िल्म के गीतकार हैं।

कंगना को इस फ़िल्म के लिए बहोत अच्छी लागत मिली है। कहा जा रहा है के फ़िल्म की कुल लागत रु१०० करोड़ से भी अधिक है। 

पर तनु वेड्स मनु रिटर्न्स के बाद कंगना की कट्टी बट्टी (२०१५), आय लव न्यू इयर (२०१५), रंगून (२०१७) और सिमरन (२०१७) ये सारी फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुयी। वहीं आलिया भट राज़ी (२०१८) के साथ रु१०० करोड़ पार करनेवाली दूसरी अभिनेत्री बन गयीं। 

इसी बीच कंगना अपने फ़िल्मों के बजाय फ़िल्म इंडस्ट्री के बड़े लोगों से अपने विवादों के लिए चर्चा में आयी, जिनमे करण जोहर और ह्रितिक रोशन जैसे नाम थे। साथ ही उनके साथ काम कर रहे लोगों से भी उनकी अनबन होने लगी। लेखक और संकलक अपूर्व असरानी ने कंगना पर आरोप किया के उन्ही की वहज से उन्हें सिमरन (२०१७) फ़िल्म से हटाया गया। ऐसा भी कहा जाता है के उनकी निर्देशक क्रिश से भी अनबन हुयी जिसके चलते क्रिशने मणिकर्णिका फ़िल्म छोड़ दी।

कंगना रनौत ने पिछले कुछ वर्षो में इंडस्ट्री में कई दुश्मन बनाये हैं और कंगना ने भी इस बात से इंकार नहीं किया है। “मुझे लगता है के ऐसे कुछ लोग हैं जो मेरी असफलता की राह देख रहे हैं,” उन्होंने प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए कहा। “कुछ ऐसे लोग हैं जो अपने आप को ये साबित करना चाहते हैं के मैं कोई खास नहीं हूँ, जिससे उन्हें अच्छा महसूस हो। मेरी असफलता उनके लिए महत्वपूर्ण है।”

पर निशांत पिट्टी के अनुसार वे इन बातों को ज़्यादा अहमियत नहीं देते। “हमें विश्वास था इसलिए हमने फ़िल्म में अपनी लागत लगाई," उन्होंने कहा। “देखा जाए तो हम सबसे पहले इन्वेस्टर्स थे और हमारे बाद झी स्टुडिओज़ इस फ़िल्म से जुडे।”

ईज़ माय ट्रिप के फाउंडर सीईओ पिट्टी के अनुसार कंगना रनौत पर उन्हें एक अभिनेत्री के तौर पर पूरा विश्वास है। “हमें विश्वास था के कंगना ही एकलौती ऐसी अभिनेत्री हैं जो इस भूमिका को निभा सकती हैं। उन्होंने फ़िल्म की सफलता के लिए अपना १००% योगदान दिया है,” उन्होंने कहा।

ट्रेड विश्लेषक गिरीश वानखेड़े भी कंगना को एक विजेता मानते हैं। “वो एक ऐसी लड़की है जिसने शून्य से शुरुआत की और एक बेहतर अभिनेत्री के रूप में उभरकर आयी। हाँ, इंडस्ट्री और मिडिया के साथ उसका रिश्ता ऊपर निचे होता रहा है। पर सभी मुश्किलों को पार कर एक बड़ी, मेनस्ट्रीम फ़िल्म में वो मुख्य भूमिका निभा रही है और वो एक विजेता बनके उभरी है।”

कंगना की कला के बारे में तो कोई सवाल नहीं है, पर उनके विवादों का मणिकर्णिका पर क्या कोई असर होगा? “इस पर मैं ये कहूंगा के वो एंटी इस्टैब्लिशमेंट और एंटी नेपोटिज़म अभिनेत्री के रूप में अपना वर्चस्व दिखा चुकी है,” वानखेड़े कहते हैं। “इसीसे उनकी लोकप्रियता है।”

ट्रेड तज्ञो का कहना है के विवाद और ऑफ़ स्क्रीन इमेज से कोई फरक नहीं पड़ता। “राजकुमार हिरानी की संजू (२०१८) का ही उदाहरण लीजिये। कितने लोगों को संजय दत्त से आत्मीयता होगी? पर लोगों ने फ़िल्म को पसंद किया। कुछ ने निर्देशक की तारीफ की, कुछ को संगीत पसंद आया। एक बार फ़िल्म क्लीक हो जाये तो फिर बाकी चीज़ें कुछ मायने नहीं रखते,” वानखेड़ेने कहा।

मंझे हुए ट्रेड विश्लेषक विनोद मिरानी का भी यही सोचना है के विवादों का फ़िल्म के चलने ना चलने से कोई संबंध नहीं। “यहाँ कौन विवादों में नहीं हैं,” उन्होंने पूछा। “यहाँ इंडस्ट्री नहीं जनता फ़िल्म का नसीब लिखती है। ये इंडस्ट्री ऐसी है के जब किसीकी फ़िल्म प्रदर्शित होती है, तो ज़्यादातर लोग चाहते हैं के वो विफल हो जाये। इसलिए एक एक्टर हो या निर्देशक, आपकी फ़िल्म प्रदर्शित होते समय आप अकेले ही वहाँ खड़े होते हैं। कंगना को उनकी ज़रूरत नहीं है। उन्होंने खुद अपनी फ़िल्म बनाई है।”

हरीश बिजूर कंसल्ट्स के ब्रैंड मार्केटिंग एक्सपर्ट हरीश बिजूर का कहना है के कंगना रनौत के जबरदस्त व्यक्तित्व से उनके ब्रैंड का भी महत्त्व बढ़ता है। “कंगना अपने आप में एक सुपरस्टार है,” उन्होंने कहा। “उनकी ब्रैंड वैल्यू उनके अभिनय की क्षमता, गंभीरता और गुणों के साथ ही शुरू होती है। और उनका प्रभावी व्यक्तित्व इसे और बढ़ाता है।”

बिजूर का ये भी कहना है के कंगना के विवादों का उनकी फ़िल्म पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा। “मणिकर्णिका का भविष्य कंगना ने उस भूमिका को दिए हुए अपने कौशल्य पर निर्भर है। बात यहीं खत्म होती है।”

पर क्या फ़िल्म को लेकर बहुत ज़्यादा उत्सुकता निर्माण की गयी है? “टीज़र से तुलना करें तो फ़िल्म का ट्रेलर ज़्यादा प्रभावी था,” वानखेड़े कहते हैं। “कंगना एक बड़ी फ़िल्म की निर्देशिका बनी है, जहाँ उसके साथ बड़े तंत्रज्ञ और क्रिएटिव आर्टिस्ट काम कर रहे हैं। फ़िल्म को जिस तरह से पेश किया जा रहा है, वो प्रभावित करती है।”

बिजूर का भी यही कहना है फ़िल्म को लेकर काफ़ी उत्सुकता है और कंगना के लिए अभिनेत्री के रूप में ये एक कसौटी है।

मिरानी का कहना है के इस समय देशभक्ति का माहौल चल रहा है। “हम राष्ट्रभक्ति, देशभक्ति के मोड़ में हैं,” उन्होंने कहा। “जैसे के फ़िल्म दिख रही है, ये एक अच्छी फ़िल्म लग रही है। इसके आसपास सिर्फ़ सकारात्मकता ही नज़र आ रही है। कास्टिंग भी अच्छी है। फ़िल्म में ज़्यादातर महत्वपूर्ण किरदार महिलाओं के हैं जो महिला दर्शकों को आकर्षित कर सकता है।”

पर अब वो स्वैग के दिन नहीं हैं जब रंगून के प्रदर्शन से पूर्व कंगना ने कहा था के वे फ़िल्म की तीसरी हीरो हैं और उनके साथी कलाकार सैफ़ अली खॉं और शाहिद कपूर से भी ज़्यादा फीज़ उन्हें दी गयी थीं। अब वो ज़्यादा विनम्र हो गयी हैं। “मैं एक बड़े फ़िल्म का छोटासा हिस्सा हूँ,” उन्होंने म्यूज़िक लॉंच के दौरान कहा।

कंगना इस फ़िल्म के साथ विजयेंद्र प्रसाद, प्रसून जोशी और शंकर एहसान लॉय जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम कर रही हैं। लोगोंसे अपने आप को ज़्यादातर दूर रखने वाले प्रसून जोशी ने भी कंगना की काफ़ी तारीफ की थी और ये भी कहा था के उनकी इस फ़िल्म से जुड़ने की वजह भी कंगना ही हैं।

पर बॉक्स ऑफिस पर मणिकर्णिका के लिए नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत बाल ठाकरे की बायोपिक ठाकरे की चुनौती भी होगी। पर गिरीश वानखेड़े के अनुसार मणिकर्णिका के पहले तीन दिन अच्छे रहेंगे।

“ठाकरे जैसी फ़िल्म को महाराष्ट्र में ज़्यादा स्क्रीन्स मिलेंगे क्योंकि ये फ़िल्म मराठी में भी प्रदर्शित हो रही है, मणिकर्णिका को भारत में २,५०० स्क्रीन्स फिर भी मिल सकते हैं,” उन्होंने कहा। “मुझे लगता है दोनों फ़िल्मों को समान रूप से स्क्रीन्स मिलेंगी। मणिकर्णिका को वर्ड ऑफ़ माउथ और सकारात्मक रिव्ह्यूज़ से फायदा हो सकता है। मुझे लगता है के पहले तीन दिनों में यह फ़िल्म रु२५-३० करोड़ नेट का बिज़नेस कर सकती है, जो की एक अच्छी शुरुआत होगी।”

पर अगर ये फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पायी तो कंगना के करिअर पर क्या असर होगा? “हाँ, करिअर पर इसका असर तो ज़रूर होगा,” उन्होंने कहा। “विवादों को फिर से ऊपर लाया जायेगा। कंगना को कुछ बड़ा कहने से परहेज़ करना होगा और अच्छी स्क्रिप्ट्स और अच्छे निर्देशक चुनने में ध्यान लगाना होगा। उसके पास मेन्टल है क्या (२०१९) है और मुझे लगता है के तनु वेड्स मनु ३ की भी घोषणा कर दी गयी है।”

आलिया भट और क्रिती सनोन जैसी नयी अभिनेत्रियों की फ़िल्में चल रही हैं और अभी अभी आयी सारा अली खॉं जैसी अभिनेत्री भी अपनी छांप छोड़ रही है, तो क्या अगर मणिकर्णिका फ्लॉप हुई तब भी कंगना प्रथम श्रेणी की अभिनेत्री कहलाएंगी? “अगर उनसे तुलना करे, तो कंगना उनसे दिग्गज है,” मिरानी ने कहा। “पर आप उनकी तुलना नहीं कर सकते। और सारा अली खॉं को उभरता सितारा कहना बहुत जल्दबाज़ी हो सकती है। सोनाक्षी सिन्हा को उनके शुरुआती वर्षो में भी ऐसा ही कहा जाता था, पर देखिये वो कहॉं है।”

मिरानी कहते हैं मणिकर्णिका के फ्लॉप होने पर भी कंगना को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। “मुझे नहीं लगता के इससे उनके करिअर पर कुछ ज़्यादा असर होगा। अक्षय कुमार को भी फ्लॉप्स का सामना करना पड़ा है, पर उससे उनकी ब्रैंड वैल्यू कम नहीं हुयी है। कंगना के पास अभी मेन्टल है क्या और अश्विनी अय्यर तिवारी की पंगा जैसी फ़िल्मे हैं। अगर उनकी अगली फ़िल्म क्लीक हो जाती है तो हम फिर से उनके तारीफों के पुल बांधते दिखेंगे।”

पर काफ़ी मुश्किलों का पहले ही सामना कर चुकी कंगना अब फिर से बॉलीवुड क़्वीन कहलवाने के लिए ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना चाहेंगी।

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