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क्रिश बनाम कंगना – कैसे स्टार पॉवर ने मणिकर्णिका के परिणाम को फीका कर दिया


जहाँ एक तरफ कंगनाने क्रिश के आरोपों का खंडन किया है, वहीं फ़िल्म के निर्माणसे जुड़े एक सूत्रने बताया के हैद्राबाद के ये निर्देशक मणिकर्णिका के रूप में एक जबरदस्त फ़िल्म देने के कगार पर थे।

Mayur Lookhar

क्रिश और कंगना एक दूसरे के विरोध में खड़े हैं पर मणिकर्णिका – द क़्वीन ऑफ़ झाँसी (2019) के निर्माता इस कॉन्ट्रोवर्सी के बारे में क्या सोचते होंगे?

झी स्टुडिओज़ और सह निर्माता निशांत पिट्टीने अभी तक इस विषय पर कोई भी टिप्पणी नहीं की। निर्माता कमल जैनने कंगना का साथ देते हुए क्रिश को कानूनन मार्ग चुनने का आवाहन किया है। पर फ़िल्म के प्रॉडक्शन टीम से जुड़े एक सूत्रने ये कहा के स्टार पॉवर के खेल ने फ़िल्म के परिणाम पर असर किया।

“मुझे किसी का पक्ष नहीं लेना है पर क्रिश जो भी कह रहे हैं वो सच है,” सूत्रने सिनेस्तान को नाम ना बताने की शर्त पर कहा।

निर्देशक क्रिशने कंगना पर उन्हें फ़िल्म से हटाने और अपने आप को बाकी किरदारों से ज़्यादा महत्व देने का आरोप किया है। उन्होंने सोनू सूद को फ़िल्म से निकालने तथा अतुल कुलकर्णी, मिष्ठी चक्रवर्ती जैसे कलाकारों के सीन्स काटने का आरोप भी किया है।

सूत्र के अनुसार एक वक़्त तक सबकुछ ठीक चल रहा था, पर बात तब ख़राब होती चली गयी जब झी स्टुडिओज़ से कुछ दृश्यों को फिरसे शूट करने के लिए कहा गया।

"क्रिश और कंगना ने कमाल का काम किया था," सूत्रने कहा। "क्रिशने फ़िल्म का जो पहला कट काटा था वो साढ़े तीन घंटे का था। कुछ और एडिटिंग के बाद फ़िल्म 160 मिनिट की बन जाती। पर झी कुछ दृश्यों पर सहमत नहीं थी। कुछ पैचवर्क की आवश्यकता थी। तकरीबन 10-15 दिन का रीशूट था। पर हमने 45 दिनों तक शूट किया।"

पर शूट इतने दिन तक आखिर क्यों खिंचा गया? सूत्र के अनुसार स्टार पॉवर हावी होना ही इसकी वजह है।

"जब कंगनाने फ़िल्म के कुछ दृश्य देखें तो उन्हें लगा के कुछ किरदारों को ज़्यादा अहमियत मिल रही है," सूत्र ने कहा। "इसलिए उन्होंने उनके दृश्य कम किये मगर खुदके बढ़ा दिए।

"क्रिश और कंगना में पहली चिंगारी तब भड़की जब सोनू सूद के रोल को लेकर उनमे तनाव बना। और तो और आप तात्या टोपे (अतुल कुलकर्णी) के दृश्यों को कम करते हैं पर संग्राम सिंह का एक किरदार बढ़ा देते हैं क्योंकि वो आपके किरदार की लम्बाई बढ़ा रहा है? संग्राम सिंह तो स्क्रिप्ट का हिस्सा भी नहीं था।"

सूद सदाशिवराव की भूमिका निभा रहे थे। उनकी जगह मोहम्मद झीशान अयूब को लिया गया। फ़िल्म की पहली प्रॉडक्शन कॉस्ट थी रु 57 करोड़, पर अतिरिक्त शूटिंग की वजह से वो रु100 करोड़ तक चली गयी।

कंगना रनौत मणिकर्णिका फ़िल्म के एक दृश्य में 

कंगना की बहन रंगोली चांडेल ने ट्विटर पर कंगना ने क्रिश और लेखक विजयेंद्र प्रसाद को भेजे टेक्स्ट मेसेज को साँझा किया था। उस मेसेज के अनुसार कंगना का ये दावा था के झी स्टुडिओज़ने क्रिशके एडिट को नकार दिया था।

पर प्रॉडक्शन टीम से जुड़े सूत्रने इससे इंकार किया। "उन्होंने उसे रिजेक्ट नहीं किया था, क्रिशके एडिट के कुछ हिस्से उन्हें पसंद नहीं आये थे। और झी ने प्रोजेक्टसे हटने की धमकी भी नहीं दी थी। वो नाख़ुश थे और उन्होंने कमल जैन को अतिरिक्त खर्चे की ज़िम्मेदारी उठाने के लिए कहा था।"

सूत्र के अनुसार कमल जैन के पास फ़िल्म के १५ प्रतिशत आईपीआर (इंटेलेक्च्युअल प्रॉपर्टी राइट्स) था वहीं पिट्टी के पास १० प्रतिशत आईपीआर था और बाकी झी के पास था। "जैन ने कोई भी लागत नहीं लगायी थी, पर उन्हें अपने आईपीआर के अधिकार झी को देने पड़े क्योंकि फ़िल्म निर्धारित लागत से ऊपर जा चुकी थी," सूत्र ने कहा। "पिट्टी के पास रु12-14 करोड़ मूल्य के आईपीआर है। झी के पास अब 90 प्रतिशत आईपीआर है, इसी लिए उन्होंने फ़िल्म को पूरा करने में ज़्यादा लागत लगायी।"

अगर झी सिर्फ़ कुछ ही दृश्यों से नाख़ुश थे तो उन्होंने क्रिश को जाने क्यों दिया? सूत्रने बताया के वो होना ही था। "झी इस फ़िल्म में इतना आगे बढ़ चुके थे के उनका पीछे हटना नामुमकिन था," सूत्रने कहा। "कंगना को इस फ़िल्म के लिए रु9 करोड़ दिए गए थे। झीने वही किया जो बाकि निर्माता करते हैं, उन्होंने अपने स्टार का साथ दिया। स्टार का पॉवर चलता ही है। इंडस्ट्री इसी तरह काम करती है। झी पहले ही रु57 करोड़ खर्च कर चुकी थी। क्रिशने अपने दिन एनटीआर बायोपिक के लिए दे रखे थे। वो शायद एक और सप्ताह फ़िल्म के लिए दे पाते पर अब सूत्र कंगना के हाथों में जा चुके थे।"

कंगना रनौत कमल जैन के साथ 

पर कमल जैन की क्या भूमिका थी?

"जैन सिर्फ़ कार्यकारी निर्माता थे," सूत्रने दावे से कहा। "उन्होंने पैसों की कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं की। वे और पिट्टी मिलकर क्रिश और विजयेंद्र प्रसाद को साइन करने हैद्राबाद गए थे। क्रिश को रु4 करोड़ देकर साइन किया गया था और विजयेंद्र प्रसाद को रु२ करोड़ दिए गए थे। झी इस फ़िल्मसे बाद में जुड़ी। इन कलाकारोंने जैन के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किये थे।"

जब निशांत पिट्टी से बात की गयी, तो उन्होंने इस निवेदन को सही बताया। "कमल जैनने फ़िल्म में एक पैसा भी नहीं लगाया। कंगना रनौत को मैंने पैसे दिए थे और कुछ और लोगों को भी मैंने ही हायर किया था," उन्होंने कहा। पर उन्होंने कॉन्ट्रोवर्सी पर कुछ भी कहने से इंकार किया।

क्रिशने यह भी आरोप किया है के कमल जैन द्वारा उनकी 70 प्रतिशत फीस नहीं दी गयी हैं, पर उन्होंने इस मुद्दे को ज़्यादा गंभीरता से नहीं उठाया था क्योंकि तब जैन अस्पताल में थे।

क्रिश के दावे को खरा बताकर सूत्र ने कहा, "फ़िल्म के ओवर-बजट हो जानेसे क्रिश अपने फीस से रु1 करोड़ छोड़ने के लिए मान गए थे। इससे उनकी फ़िल्म के प्रति निष्ठा का पता चलता है।"

इस विषय पर अपना मुद्दा रखने के बाद अब शायद क्रिश भी इस मामले को ख़तम करना चाहते हैं। सिनेस्तान के लगातार प्रयास के बाद भी उन्होंने इस विषय पर कुछ भी कहने से इंकार किया।

"मैंने कुछ मंचों पर अपने सच को सबके सामने रखा क्योंकि मैं नहीं चाहता के ऐसे व्यवहार की लोगों को आदत सी बन जाए," उन्होंने सिनेस्तान से कहा। "अब ये बात यहीं ख़तम होती है। मैंने जो बाकि इंटरव्ह्यू में कहा है उसके अलावा अब मेरे पास कुछ और कहने के लिए नहीं है। कृपया मुझे मेरे दूसरे प्रोजेक्ट पर ध्यान देने दीजिये।"

मगर कमल जैनने कंगना रनौत के दावे को सच बताया है। रनौत के दावे के अनुसार झी स्टुडिओज़ और जैनने क्रिएटिव निर्णय लिए थे, खास कर निर्देशकों के क्रेडिट का मुद्दा। 1 फरवरी को कंगनाने क्रिश के आरोपोंका खंडन करते हुए कहा के ये निर्माताओं का निर्णय था के क्रिश का ओरिजिनल नाम राधा कृष्ण जगारलामुडी को क्रेडिट में इस्तेमाल किया जाए।

कंगनाने ये भी बताया के उन्होंने अंतिम महत्वपूर्ण निर्णय कैसे लिए। "इसे सौभाग्य कहिये या दुर्भाग्य, मैंने ये फ़िल्म निर्देशित की है। सारे अंतिम निर्णय मैंने लिए हैं। फ़िल्म अब प्रदर्शित हो चुकी है। अब इसमें और कुछ नहीं किया जा सकता है," उन्होंने यूट्यूब चैनल नैशनल रिपोर्टर से बात करते हुए कहा।

कंगनाने अपने सह कलाकारों पर भी रोष प्रकट किया जिन्होंने उनके रोल को कम करने का आरोप किया था। "जो भी मुझ पर अपने रोल को कम करने का आरोप कर रहे हैं, उनसे मैं बस एक ही बात कहना चाहूँगी। मैंने आज जो कुछ कमाया है वो अपने बलबूते पर कमाया है। मैंने भी ५ मिनिट के रोल से शुरुवात की थी। मेरे भी रोल को कम कर दिया जाता था। मुझे अंतिम पलो में बदल दिया जाता। अगर आप इसे पॉवर कहते हैं, तो मैंने उसे पाया है। एक निर्देशक के रूप में ये मेरा निर्णय है के मैं किस कलाकार को किस तरीकेसे इस्तेमाल करूँ। जो भी मुझ पर आरोप कर रहे हैं उन्होंने मुझसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझ पर आरोप करके उन्हें कुछ हासिल नहीं होनेवाला।"

फ़िल्म की अंतिम कालावधि 148 मिनिट रखी गई, जो क्रिशने तय किये हुए कालावधिसे सिर्फ़ १२ मिनिट कम है।

मगर सूत्र ने कंगना के प्रयास की सराहना की। "जो हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण था," सूत्र ने कहा। "पर फिर भी कंगनाने इस फ़िल्म के लिए जो श्रम लिए हैं उसके लिए उनकी प्रशंसा होनी ही चाहिए।

"वे जख़्मी हो गयी थीं, उन्हें टाँके भी लगे थे, मगर फिर भी वे कठिनाई भरे परिस्थिति में भी शूटिंग करती रहीं। चिंता बस ये है के फ़िल्म शायद रु१०० करोड़ तक के आसपास ही बिज़नेस कर पायेगी।"

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