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'दो लफ्ज़ों की है दिल की कहानी' के इटालियन रोमांस की ४०वि वर्षगांठ


शक्ति सामंता निर्देशित द ग्रेट गैंबलर (१९७९) ४० वर्ष पूर्व ६ अप्रैल को प्रदर्शित हुई थी। इस फ़िल्म के आर डी बर्मन ने संगीतबद्ध किए गोंडोला गाने से आइये फिर एक बार मिलते हैं।

Sonal Pandya

फ़िल्मकार शक्ति सामंता द ग्रेट गैंबलर (१९७९) फ़िल्म से अपने पसंदीदा सस्पेंस थ्रिलर शैली में वापस आए थे। अमिताभ बच्चन इस फ़िल्म में दोहरी भूमिका में थे।

१९५८ में सामंता ने हावड़ा ब्रिज फ़िल्म बनाई थी, उसके बाद उसी तरह की कहानी लेकर उन्होंने द ग्रेट गैंबलर बनाई। उन्ही की निर्देशित चायना टाउन (१९६२) में ऐसी ही कहानी थी, जहाँ दो जुड़वा भाई अलग हो जाते हैं और जब जवानी में आमने सामने आते हैं तो दोनों एक दूसरे को कानून के दो विरुद्ध छोर पर पाते हैं।

आईएमडीबी के अनुसार सामंता अपने पसंदीदा कलाकार शम्मी कपूर के साथ यह फ़िल्म १९६७ में बनाना चाहते थे। पर फ़िल्म एक दशक बाद सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ बनी।

दो भाइयो में जय पत्तो के खेल में माहिर है तो विजय पुलिस इंस्पेक्टर है। पर इसे भाग्य का खेल कहें या हिंदी फ़िल्मों के लेखकों का कमाल, दोनों भाई यूरोप पहुंचते हैं और लोग उन्हें एक दूसरे के नाम से पहचानने लगते हैं।

द ग्रेट गैंबलर की शूटिंग मिस्र के कैरो, पोर्तुगाल के लिस्बन, इटली के रोम और वेनिस जैसे कई खूबसूरत शहरो में स्टाइलाइज़्ड तरीकेसे की गई थी। पर यह फ़िल्म आज एक खास गाने के लिए जानी जाती है, जो है आर डी बर्मन का बेमिसाल गीत 'दो लफ्ज़ों की है दिल की कहानी'। इस गाने को वेनिस में फ़िल्माया गया था।

हालांकि कई लोगों को इस फ़िल्म का क्लिष्ट स्क्रीनप्ले शायद अब याद भी न हो, पर आर डी बर्मन के संगीत में आनंद बक्शी द्वारा लिखित ये गीत आज भी उनकी ज़ुबान पर है।

वेनिस की खूबसूरत जगह पर जय शबनम (ज़ीनत अमान) के साथ घूम रहा है। शबनम जय को विजय समझ कर उसके साथ है। दोनों एक गोंडोला (कश्ती) पे सवार हैं और साथ में एक कश्तीवाला भी इटालियन भाषा में 'अमोरे मिओ...' गा रहा है।

गाने में जय शबनम को पूछता है के कश्तीवाला क्या गए रहा है वो उसे समझाए और शबनम 'दो लफ्ज़ों की है दिल की कहानी' गाना सुनाती है। फ़िल्म के आईएमडीबी ट्रिविया में लिखा है के इस गाने के इटालियन बोल को बर्मन और शरद कुमार ने रचा और शरद कुमार ने इटालियन बोल को अपनी आवाज़ भी दी।

इस गाने की प्रेरणा आर डी बर्मन को पॅरिस इज़ ऑल्वेज़ पॅरिस (१९५१) फ़िल्म के 'ले स्सयं मोर्त', याने के 'सूखे पत्ते', इस गाने से मिली थी। आशा भोसले को ये बर्मन की धुन बेहद पसंद आई थी और उन्होंने इस गाने को अपना सबसे पसंदीदा बताया है।

ये गाना जितना लोकप्रिय हुआ, उतनी लोकप्रियता इस फ़िल्म को ना मिल सकी। फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, पर १९७० के दशक को याद करनेवालों के लिए ये फ़िल्म कल्ट क्लासिक है। फॉरेन लोकेशन्स और अमिताभ बच्चन, ज़ीनत अमान, नीतू सिंह, मदन पूरी, उत्पल दत्त, प्रेम चोपड़ा और इफ्तेकार जैसी बड़ी स्टार कास्ट को लेकर बनी सस्पेंस थ्रिलर द ग्रेट गैंबलर उस ज़माने की बड़ी फ़िल्मों में से एक थी।

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