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ब्लैंक का 'अली अली' गाना – सूफी गाने पर झूम रहे हैं अक्षय कुमार और करण कापडिया


इस गाने का संगीत निर्देशन अर्को ने किया है तथा इसे उनके साथ बी प्राक ने गाया है।

Shriram Iyengar

अक्षय कुमार के अलग अलग रूप आप इस समय देख सकते हैं। हाल ही में वे एक पत्रकार के रूप में बातचीत करते दिखे थे। अब बेहज़ाद खम्बाटा की निर्देशकीय पहली फ़िल्म ब्लैंक के 'अली अली' गाने में भी वे नज़र आ रहे हैं। इस फ़िल्म से अक्षय कुमार के साले साहब करण कापडिया अभिनय क्षेत्र में पहला कदम रख रहे हैं।

केंड्रिक लमर और एसझेडए के 'ऑल द स्टार्स' गाने के विडिओ से प्रभावित ये गाना बिलकुल ही अलग रूप में शूट किया गया है। कभी ग्रीक तत्वज्ञों के भांति, तो कभी अलग सूट्स में पूरे गाने में दोनों कलाकार भिन्न वेशभूषा में नज़र आ रहे हैं। पर सर पर आग लगाए खड़े डान्सर्स आपका ध्यान विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।

अर्को का संगीत सम्मोहक अवश्य है पर ये यादगार बने ऐसी खास बात यहाँ नहीं है। जहाँ एक तरफ गाने के दृश्य आपको २००० के दशक के शुरुवाती वर्षों के म्युज़िक वीडिओज़ की याद दिलाते हैं, वहीं ये गाना भी आपको हिमेश रेशमिया के शुरुवाती अल्बम्स की याद दिलाता है।

बी प्राक और अर्को ने इस गाने को बखूबी गाया है। इस गाने को सूफ़ी गानों का रूप देने की कोशिश अवश्य की गई है, लेकिन वो उतना प्रभावी नहीं बन पाया है। अर्को और अदीप सिंह के बोल कुछ समय बाद दोहराये जाते हैं।

जहाँ गाने में अल्लाह ही सबका नीबेहगार है इस बात को बताया जा रहा है, वहीं गाने के दृश्यों में और संगीत में असमानताएं स्पष्ट रूप से नज़र आती हैं। रंजू वर्घिस की कोरिओग्राफी भी गाने के विपरीत लगती है। हालांकि अक्षय कुमार इस तरह के गाने में आसानी से अपनी छाप छोड़ते हैं, पर करण कापडिया यहाँ असहज लग रहे हैं। उनके चेहरे पर भाव ही नज़र नहीं आते जिससे उन्हें देखना सहज नहीं रहता।

ब्लैंक ३ मई को प्रदर्शित हो रही है। गाना यहाँ देखें।     

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